🇪🇷तृतीय नवरात्र "महाशक्ति माता चन्द्रघंटा"🇪🇷 🇮🇲🇮🇲🇮🇲🇮🇲🇮🇲🇮🇲🇮🇲🇮🇲🇮🇲🇮🇲🇮🇲🇮🇲🇮🇲🇮🇲 मार्कंडेय पुराण के अनुसार तृतीय नवरात्र की देवी का नाम मां चंद्रघंटा देवी है।
🇪🇷तृतीय नवरात्र "महाशक्ति माता चन्द्रघंटा"🇪🇷
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मार्कंडेय पुराण के अनुसार तृतीय नवरात्र की देवी का नाम मां चंद्रघंटा देवी है।
ग्रंथों में निहित कथा के अनुसार जब भगवान् शिव ने देवी को समस्त विद्ययों का ज्ञान प्रदान करना शुरू किया तो देवी उस ज्ञान का तप के लिए प्रयोग करने लगी।
लगातार आगम निगमों का ज्ञान प्राप्त कर देवी महातेजस्विनी हो गयी व सभी कलाओं सहित तेज पुंज बन योगमाया के रूप में स्थित हो गयी।
तब प्रसन्न होकर भगवान शिव ने देवी को अपने साथ एकाकार कर अर्धनारीश्वर रूप धरा।
उस समय देवी पार्वती जी को अपने वास्तविक स्वरुप का बोद्ध हुआ, तब शिव से अलग हो आकाश में देवी ने सिंह पर स्वर हो दस भुजाओं वाला एक अद्भुत रूप धारण किया।
हाथों में कमल पुष्प, धनुष, त्रिशूल, गदा, तलवार सहित वर मुद्रा धारण की, क्योंकि देवी तपस्विनी रूप में थी तो एक हाथ में माला और एक हाथ में उनहोंने कमंडल धारण कर लिया।
सभी ऋषि मुनि देवता देवी के तेज को सह नहीं पा रहे थे तब भगवान शिव ने चन्द्रमा को देवी के शीर्ष स्थान पर बिराजने को कहा, जिससे उनका तेजस्वी स्वरूप अब और भी सुन्दर तथा शीतल हो गया।
तब सभी देवताओं नें देवी की जय जयकार की तथा उनको चंद्रघंटा देवी के नाम से पुकारा।
जो भी भक्त देवी के ऐसे दिव्य रूप की पूजा करता है, वो एक साथ संसार में तथा मुक्ति के मार्ग पर भी एक ही समय चल सकता है।
भौतिक संसार में तो आगे बढ़ता ही है साथ अध्यात्म में भी शिखर पर रहता है।
सभी विद्यार्थियों, साधको, भक्तों को देवी चन्द्रघंटा के दर्शनों से महासिद्धियाँ प्राप्त होती हैं, व्यक्ति को अहंकार रहित ज्ञान प्राप्त होता है।
जय माता दी

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